Tata Trusts Venu Srinivasan

टाटा ट्रस्ट्स में बड़ा बदलाव: वेणु श्रीनिवासन बने आजीवन ट्रस्टी, ट्रस्ट के अंदरूनी मतभेद फिर चर्चा में

मुंबई/नई दिल्ली।
टाटा समूह से जुड़ी सबसे बड़ी चैरिटेबल संस्था Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) ने एक अहम फैसला लिया है।
औद्योगिक जगत की जानी-मानी हस्ती वेणु श्रीनिवासन को उनके तीन साल के कार्यकाल की समाप्ति से एक दिन पहले ही आजीवन ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सभी ट्रस्टीज़ ने सर्वसम्मति से इस निर्णय को मंजूरी दी। यह फैसला रतन टाटा के निधन के बाद बने “लाइफ ट्रस्टीशिप” के प्रस्ताव से जुड़ा माना जा रहा है।


⚖️ क्यों अहम है यह फैसला?

टाटा ट्रस्ट्स, टाटा समूह का मूल आधार है —
इन्हीं ट्रस्ट्स के पास Tata Sons की लगभग 66% हिस्सेदारी है।
यानी समूह का नियंत्रण इन्हीं के हाथ में है।
ऐसे में किसी भी ट्रस्टी की नियुक्ति या बदलाव का सीधा असर पूरे टाटा समूह के प्रबंधन और दिशा पर पड़ता है।


🧩 लाइफ ट्रस्टीशिप पर दो धड़े — मतभेद बरकरार

पिछले साल अक्टूबर 2024 में टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि —

“किसी भी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होने पर उसे दोबारा नियुक्त किया जा सकता है, और यह पुनर्नियुक्ति अनिश्चित काल के लिए होगी, कानून के अनुरूप।”

लेकिन अब इसी प्रस्ताव की व्याख्या को लेकर दो मत बन गए हैं।

  • एक पक्ष का कहना है कि लाइफ ट्रस्टी बनने से पहले कार्यकाल का नवीनीकरण आवश्यक है,

  • जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि कार्यकाल पूरा होते ही लाइफ ट्रस्टीशिप अपने आप लागू हो जानी चाहिए।

इसी मतभेद को सुलझाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों को बुलाया गया है, जो पिछले साल के प्रस्ताव की व्याख्या पर काम कर रहे हैं।


🧠 सरकार भी आई बीच में — अहम बैठक में अमित शाह और निर्मला सीतारमण शामिल

टाटा ट्रस्ट्स के अंदर चल रहे इस असमंजस ने अब केंद्र सरकार का ध्यान भी खींच लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट्स के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ नई दिल्ली में बैठक की।

सरकार की चिंता यह है कि ट्रस्ट्स के बीच असहमति कहीं समूह की स्थिरता को प्रभावित न करे —
क्योंकि टाटा सन्स का सार्वजनिक लिस्टिंग मुद्दा भी इसी समय गर्माया हुआ है।


💼 टाटा सन्स की लिस्टिंग को लेकर असमंजस

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2022 में अपने Scale-Based Regulatory Framework के तहत टाटा सन्स को 30 सितंबर 2025 तक लिस्ट होने का निर्देश दिया था।
लेकिन यह डेडलाइन गुजर चुकी है और अब तक कंपनी ने पब्लिक लिस्टिंग नहीं की है।

इस बीच, शापूरजी पलोनजी ग्रुप, जिसके पास 18% हिस्सेदारी है, लिस्टिंग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है।
वहीं, टाटा ट्रस्ट्स और टाटा सन्स अभी तक निजी बने रहने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।


📜 मेहली मिस्त्री की नियुक्ति भी चर्चा में

वेणु श्रीनिवासन के बाद अब नजरें एक और बड़े नाम पर हैं — मेहली मिस्त्री,
जिनका कार्यकाल Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust दोनों में 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो रहा है।
संकेत मिल रहे हैं कि उनकी भी नियुक्ति को “लाइफ ट्रस्टी” के रूप में बढ़ाया जा सकता है।


🧭 रतन टाटा की विरासत और ट्रस्ट्स की दिशा

रतन टाटा के निधन के बाद से ही ट्रस्ट्स की दिशा पर कई सवाल उठे हैं।
उन्होंने हमेशा टाटा समूह को “व्यवसाय से अधिक सेवा” की भावना से चलाया।
लेकिन अब नए दौर में —

  • लाइफ ट्रस्टीशिप,

  • सरकारी निगरानी,

  • और सार्वजनिक लिस्टिंग जैसे मुद्दे
    टाटा समूह के भविष्य की नीति को तय करेंगे।


📊 क्या होगा आगे?

  1. कानूनी व्याख्या तय करेगी कि भविष्य में ट्रस्टी कैसे चुने जाएंगे।

  2. सरकार की भूमिका बढ़ सकती है, क्योंकि समूह का आकार राष्ट्रीय महत्व का है।

  3. टाटा सन्स की लिस्टिंग पर बड़ा फैसला जल्द जरूरी होगा।


📌 निष्कर्ष

वेणु श्रीनिवासन की आजीवन नियुक्ति सिर्फ एक ट्रस्टी निर्णय नहीं, बल्कि टाटा समूह के शक्ति-संतुलन का संकेत है।
यह कदम बताता है कि समूह अपनी विरासत को स्थिर रखना चाहता है, भले ही अंदरूनी मतभेद क्यों न हों।

आने वाले महीनों में टाटा ट्रस्ट्स, सरकार, और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के बीच बातचीत तय करेगी कि क्या भारत का यह प्रतिष्ठित औद्योगिक घराना निजी रहेगा या जनता के लिए शेयर बाजार में खुलेगा।


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