भिंड कॉलेज फर्जीवाड़ा

Bhind College Scam: 90+ निजी कॉलेजों में फर्जीवाड़ा उजागर, कलेक्टर का बड़ा एक्शन | MP News

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में संचालित डीएड, बीएड, नर्सिंग, आईटीआई, पैरामेडिकल और फार्मेसी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों वाले 90 से अधिक निजी कॉलेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर किरोड़ी लाल मीणा ने उच्च शिक्षा विभाग और छात्रवृत्ति विभाग को पत्र लिखकर निजी कॉलेजों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम अनिवार्य करने की सिफारिश की है, ताकि फर्जी छात्रों और कागजी स्टाफ पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।


छात्रवृत्ति के नाम पर चल रहा था खेल

कलेक्टर कार्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी कॉलेजों में छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते, फिर भी उन्हें कागजों में नियमित दर्शाकर छात्रवृत्ति की राशि निकाली जा रही है।
शिकायतों में यह भी सामने आया कि कुछ कॉलेज मोटी रकम लेकर दूसरे राज्यों के छात्रों का प्रवेश कराते हैं और पढ़ाई की बजाय केवल परीक्षा के समय औपचारिक उपस्थिति पूरी कराई जाती है।


बायोमेट्रिक सिस्टम से होगी फर्जी छात्रों-स्टाफ की पहचान

कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि यदि निजी कॉलेजों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू कर दी जाए, तो:

  • फर्जी छात्रों की पहचान आसान होगी

  • कागजी स्टाफ का खुलासा होगा

  • केवल वास्तविक छात्रों को ही छात्रवृत्ति और सरकारी लाभ मिलेंगे

  • शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी

उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा विभाग यदि इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करे, तो ऐसे फर्जीवाड़ों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।


जांच में चौंकाने वाले खुलासे

भौतिक सत्यापन के दौरान कई कॉलेजों में हालात बेहद चिंताजनक पाए गए।

  • कई संस्थानों में न छात्र मिले, न शिक्षक

  • क्लासरूम खाली थे, जबकि रजिस्टर में उपस्थिति पूर्ण दिखाई गई

  • कुछ कॉलेजों में दर्ज स्टाफ वास्तव में मौजूद ही नहीं था

  • एक मामले में तो कॉलेज की इमारत तक नहीं मिली, फिर भी रिकॉर्ड में संस्थान संचालित दिखाया जा रहा था


20 जांच टीमों ने किया भौतिक सत्यापन

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की 20 जांच टीमें गठित कीं।
इन टीमों ने भिंड, मेहगांव, गोहद, लहार, अटेर और फूप क्षेत्रों में स्थित 90 से अधिक निजी कॉलेजों का निरीक्षण किया।
जांच में यह भी सामने आया कि कई जगह भवन की स्थिति जर्जर थी और कहीं-कहीं पढ़ाई पूरी तरह बंद मिली।


डीएड-बीएड कॉलेजों की अलग से जांच

डीएड और बीएड कॉलेजों की जांच आनंद शर्मा (डाइट प्राचार्य) द्वारा अलग से कराई गई।
इस जांच में:

  • छात्रों की संख्या रिकॉर्ड से काफी कम पाई गई

  • टीचिंग स्टाफ की मौजूदगी संदिग्ध रही

  • कई संस्थानों ने नियमों का खुला उल्लंघन किया

डाइट प्राचार्य ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।


शिक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

90 से अधिक कॉलेजों में सामने आई इस गड़बड़ी ने यह साफ कर दिया है कि कुछ निजी संस्थान शिक्षा देने के बजाय डिग्री और छात्रवृत्ति के नाम पर कारोबार कर रहे हैं।

अब प्रशासन:

  • कॉलेजों की मान्यता

  • छात्रवृत्ति वितरण

  • स्टाफ और छात्र रिकॉर्ड
    की गहन जांच कर रहा है और दोषी संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।


📌 निष्कर्ष

भिंड का यह मामला प्रदेश की निजी उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। यदि समय रहते बायोमेट्रिक जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं और कड़ी निगरानी लागू नहीं की गईं, तो शिक्षा का उद्देश्य कमजोर पड़ता रहेगा।

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