Indian Bank ने शनिवार को मेरठ स्थित अपने अंचल कार्यालय के सभागार में हिंदी कार्यशाला और बैंकिंग शब्दावली प्रतियोगिता का आयोजन किया। कार्यक्रम में राजभाषा के व्यावहारिक प्रयोग और बैंकिंग कार्यों में उसकी भूमिका पर केंद्रित चर्चा रही।
यह आयोजन नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक एवं बीमा) के तत्वावधान में हुआ, जिसमें शहर के विभिन्न बैंकों और बीमा कंपनियों के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यशाला का फोकस
कार्यशाला में हिंदी के प्रयोजनमूलक प्रयोग, ऑनलाइन तिमाही विवरणी, हिंदी पत्राचार, राजभाषा से जुड़े नियम, व्याकरण संबंधी सामान्य त्रुटियां और वार्षिक कार्यक्रम जैसे विषयों को शामिल किया गया।
उद्देश्य साफ था—दैनिक बैंकिंग कार्यों में हिंदी के सहज और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना।
अध्यक्षीय संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता बैंक के उप अंचल प्रबंधक नवीन जैन ने की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी ऐसी भाषा है जिसे बोलने और लिखने में अधिकांश लोग सहज महसूस करते हैं, फिर भी व्यावसायिक उपयोग में उसका पूरा लाभ नहीं उठाया जाता।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजभाषा के निरंतर प्रयोग से न केवल कार्यप्रणाली सरल होती है, बल्कि संस्थान की प्रभावशीलता भी बढ़ती है। उन्होंने राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा तय लक्ष्यों की ओर भी ध्यान दिलाया।
निरंतरता का भरोसा
नवीन जैन ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं आगे भी नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि राजभाषा के प्रति जागरूकता बनी रहे और कर्मचारियों को व्यावहारिक लाभ मिल सके।
उन्होंने प्रतिभागियों और नराकास (बैंक एवं बीमा) के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
शहर स्तर पर सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर नराकास (बैंक एवं बीमा) के सदस्य सचिव मनोज कुमार ने कहा कि Meerut में इस स्तर की गतिविधियां पहले कभी इतनी व्यापक नहीं रहीं।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष नराकास मेरठ को क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय से सम्मान प्राप्त होगा।
व्यवसाय और भाषा का संबंध
मुख्य प्रबंधक शुभम रस्तोगी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदी का अधिक उपयोग बैंकों के व्यावसायिक हित में है।
उन्होंने इसे ग्राहकों के साथ बेहतर संवाद और भरोसे का माध्यम बताया।
सहयोग और सहभागिता
कार्यक्रम के सफल आयोजन में दीपक कोहली, रजनीश कुमार, युग्मिता सिंह, नमिता प्रसाद, ज्योत्स्ना सिंह, संजीव कुमार, अजय जैन, कीर्ति खत्री, रोबिन सिंह, नितेश रावत, विशाल शर्मा, शिव कुमार, अभिषेक भाटी, लखन पाल, विशाल और अनिल कुमार सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग रहा।
यह आयोजन बैंकिंग क्षेत्र में राजभाषा के सशक्त और व्यावहारिक प्रयोग की दिशा में एक संगठित प्रयास के रूप में देखा गया।
