टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम लिस्ट सामने आई और पहली प्रतिक्रिया शोर की नहीं थी।
वो अजीब सा सन्नाटा था, जो तब आता है जब कुछ उम्मीद के खिलाफ हो जाए।
कुछ नाम ऐसे थे जिन पर किसी ने सवाल नहीं किया।
और फिर एक नाम आया, जिस पर कमरे में बैठे लोग एक-दूसरे को देखने लगे।
ये चयन अचानक नहीं था।
अचानक सिर्फ़ हमें लगा।
पिछले एक साल में टीम इंडिया ने टी20 को गंभीरता से नहीं, बल्कि प्रयोगशाला की तरह ट्रीट किया है।
लगातार बदलते ओपनर, नंबर चार पर प्रयोग, और गेंदबाज़ी में अजीब संयोजन।
इस चयन ने साफ कर दिया कि ये प्रयोग खत्म नहीं हुए, बस अब आधिकारिक हो गए हैं।
जिस खिलाड़ी का नाम सबसे ज़्यादा चौंकाता है, उसकी समस्या कभी टैलेंट नहीं रही।
समस्या ये रही कि वो टीम के narrative में फिट नहीं बैठता था।
वो न तो सोशल मीडिया का शोर था, न टीवी स्टूडियो का पसंदीदा चेहरा।
चयनकर्ताओं ने इस बार फॉर्म से ज़्यादा संदर्भ देखा।
किस हालात में रन बने, किस दबाव में विकेट आए, और किस मैच में खिलाड़ी गायब रहा।
यही वो जगह है जहाँ कुछ बड़े नाम चुपचाप बाहर चले गए।
यहाँ असहज सच्चाई ये है कि टीम इंडिया अब भरोसे पर नहीं चल रही।
नामों पर नहीं।
और शायद यादों पर भी नहीं।
इस चयन में एक जोखिम साफ दिखता है।
जिस खिलाड़ी को चुना गया है, वो अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधूरा है।
पर शायद चयनकर्ताओं ने यही अधूरापन पसंद किया — क्योंकि उसे mould किया जा सकता है।
कुछ सीनियर खिलाड़ियों के लिए ये चयन एक संदेश है, बयान नहीं।
टी20 में आपका अतीत नहीं, आपकी ताज़ा उपयोगिता मायने रखती है।
और उपयोगिता अब सिर्फ़ स्ट्राइक रेट या इकॉनमी नहीं है।
ये टीम कागज़ पर संतुलित लग सकती है, मैदान पर नहीं।
और शायद यही सोच है।
2026 का टी20 वर्ल्ड कप जीतने के लिए सुरक्षित टीम नहीं, असहज टीम चाहिए।
भारतीय क्रिकेट टीम ने इस बार फैंस की भावनाओं से दूरी रखी है।
और यही दूरी आगे जाकर या तो जीत में बदलेगी, या बहुत महँगी पड़ेगी।
क्योंकि अगर ये सरप्राइज चला, तो इसे दूरदर्शिता कहा जाएगा।
और अगर नहीं चला, तो यही चयन सबसे पहला सवाल बनेगा।
