Sanchar Saathi app controversy

Sanchar Saathi से Social Media तक: भारत में शुरू हो चुका है ‘Uninstall आंदोलन’

सालों से हम विरोध का मतलब समझते आए थे —
चिल्लाकर बोलो, हैशटैग चलाओ, सड़कों पर निकलो।

लेकिन 2025 में भारत का विरोध बदल चुका है।
लोग कुछ नहीं बोलते…
कोई ट्वीट नहीं…
कोई पोस्ट नहीं…

बस चुपचाप UNINSTALL कर देते हैं।

इसको कहा जाता है – STEALTH PROTEST

यह विरोध इतना शांत है कि कोई शोर नहीं, लेकिन इतना ताकतवर है कि सरकार और कंपनियाँ दोनों अपनी नीतियाँ बदलने पर मजबूर हो गईं।


🧩 क्या है Stealth Protest?

Stealth Protest मतलब –
बिना बोले विरोध करना, बस अपनी “यूज़र पावर” से जवाब देना।

  • App uninstall करना

  • Permissions revoke करना

  • Notifications ब्लॉक करना

  • Background data बंद कर देना

  • Alternative platforms पर शिफ्ट हो जाना

यूज़र कुछ नहीं कहता, लेकिन उसका एक action बहुत कुछ कह देता है:
“मुझे भरोसा नहीं है – इसलिए मैं बाहर निकल रहा हूँ।”


🔐 डेटा लीक का डर: लोगों की सबसे बड़ी चिंता

2023–2025 के बीच भारत में इतने data leaks हुए कि लोगों का भरोसा लगभग खत्म हो चुका है।
अब किसी भी नए या पुराने ऐप से लोग सिर्फ़ यही पूछते हैं:

  • क्या यह मेरा डेटा सुरक्षित रख पाएगा?

  • क्या यह मेरा लोकेशन, कॉल लॉग, SMS तक पहुँच माँगेगा?

  • क्या यह चोरी-छुपे सुन या देख सकता है?

  • क्या इस ऐप को जबरदस्ती फ़ोन में डाला जा रहा है?

आज भारतीय यूज़र की डिफ़ॉल्ट मानसिकता बन चुकी है:
“अगर ज़्यादा permissions माँग रहा है, तो ख़तरा है।”

यही वजह है कि सरकारी हो या private, दोनों तरह के apps अनइंस्टॉल किए जा रहे हैं।


📱 Sanchar Saathi Controversy ने आग में घी डाल दिया

2025 में सबसे बड़ा डिजिटल विवाद तब हुआ जब टेलीकॉम से जुड़ा एक नया सरकारी ऐप लोगों के फ़ोन में अपडेट्स के साथ आने लगा।

लोगों को ये समस्याएँ दिखीं:

  • ऐप कई sensitive permissions चाहता था

  • इसे pre-installed बताया गया

  • यूज़र को लगा वह इसे remove नहीं कर पाएगा

  • Privacy को लेकर सवाल खड़े हुए

  • Device monitoring की आशंका बढ़ी

बहुत सारे लोग चुप रहे, कोई सोशल मीडिया पर बहस नहीं हुई —
लेकिन Uninstall और Disable करने की लहर तेजी से बढ़ गई।

Privacy को लेकर बढ़ते दबाव के बाद सरकार को अपनी नीति बदलनी पड़ी।

इस घटना ने एक बात साफ़ कर दी:
आज का यूज़र बिना बोले भी नीतियाँ बदलवा सकता है।


🏛 लोग सिर्फ सरकारी Apps नहीं, Private Platforms भी Uninstall कर रहे हैं

सिर्फ सरकार नहीं…
Private कंपनियाँ भी इस ‘Uninstall आंदोलन’ से डरती हैं।

1️⃣ Social Media Apps

Toxicity, algorithm fatigue, data sharing और addictive design के कारण:

  • Facebook

  • Instagram

  • X

  • Short video apps

इनके uninstall rate में तेजी आई है।

लोग कह रहे हैं:
“मैं बस WhatsApp, banking और essential apps तक सीमित रहूँगा।”


2️⃣ Betting, Gaming और Shady Apps

Online betting और gaming apps पर:

  • पैसे फँसने

  • Account freeze

  • Fraud

  • Laws का खतरा

इन सबके बाद लोग चुपचाप uninstall कर देते हैं।
लोग public में complaint नहीं करना चाहते — लेकिन quietly exit कर जाते हैं।


3️⃣ Brand Controversies = Silent Uninstall

जब भी कोई brand विवाद में फँसता है —
यूज़र uninstall कर देता है, ट्वीट नहीं करता।

क्यों?

क्योंकि आज की digital economy में सबसे ताकतवर विरोध है – exit करना, engagement नहीं।


🧘 लोग चुप क्यों रहते हैं? खुलकर विरोध क्यों नहीं करते?

✔ 1. Online trolling का डर

जैसे ही कोई सरकारी या बड़े brand के खिलाफ़ पोस्ट करता है —
trolling, hate comments और targeting का खतरा बढ़ जाता है।

Uninstall करना safer है।

✔ 2. Algorithm fatigue

लोग समझ चुके हैं:
गुस्सा दिखाओगे → algorithm उसे promote करेगा → प्लेटफॉर्म को फायदा होगा।

इसलिए वे engagement की बजाय exit चुनते हैं।

✔ 3. Personal Control वापस लेना

Apps की notification, tracking और data collection से लोग थक चुके हैं।
Uninstall करने पर उन्हें लगता है कि:

“अब phone मेरा है, मैं control में हूँ।”

✔ 4. “पहले ही leak हो चुका है” वाली भावना

लोग सोचते हैं:

“मेरा पुराना डेटा गया सो गया… अब नया leak नहीं होने दूँगा।”


Technical Reason: Permissions का डर

जब कोई app माँगता है:

  • Microphone access

  • Camera access

  • Exact location

  • Contacts

  • Call logs

  • SMS

  • Storage

तो यूज़र की पहला प्रतिक्रिया होती है:
“कुछ suspicious है, delete करो।”


🔥 Silent Protest का असर सरकार और कंपनियों पर कैसा हो रहा है?

  1. Pre-installed apps को लेकर backlash बढ़ रहा है

  2. Forced apps अब political risk बन चुके हैं

  3. कंपनियाँ Privacy-first UI और minimal permissions अपनाने लगी हैं

  4. Opt-in और Opt-out policies आ रही हैं

  5. App makers अब Tracking और Ad IDs पर खुलकर सूचना देने लगे हैं

Stealth Protest ने एक बड़ा message दिया:
“अगर भरोसा नहीं, तो user वापस नहीं।”


📝 2025 में User Protest का नया फॉर्मूला: Engagement नहीं, Exit

पुराने समय में सोशल मीडिया गुस्सा था:

  • 1-star reviews

  • Angry tweets

  • Boycott hashtags

अब trend यह है:

  • कोई review नहीं

  • कोई tweet नहीं

  • बस quietly Uninstall

Digital Economy की भाषा में कहें तो:

  • DAU गिरता है

  • MAU गिरता है

  • Retention टूटता है

  • App का मूल्य घट जाता है

यही असली नुकसान है।


🛡 Users क्या करें? (Smart Guide)

✔ App को install करने से पहले permissions चेक करें
✔ Pre-installed app है तो background data रोकें
✔ Mic/Camera/Loco permissions जितना हो deny करें
✔ Alternative apps देखें
✔ Privacy settings के साथ खेलें नहीं — समझकर use करें
✔ अनजान apps को कभी भी auto-update allow न करें


💡 Bottom Line:

2025 में भारत का यूज़र जाग चुका है।
वह चिल्लाता नहीं, नारे नहीं लगाता…
वह बस quietly इतना करता है:

Uninstall.

और यही आज का सबसे बड़ा Digital Protest है।

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