RTI extortion cases

स्कूल से बिल्डर तक! RTI Extortion Racket 2025 का पूरा नेटवर्क पहली बार उजागर

1. शुरुआत: एक कानून, दो चेहरे

सूचना का अधिकार (RTI) देश में इसलिए लाया गया था ताकि लोग सरकारी दफ्तरों में छुपे फाइलों का सच जान सकें।
लेकिन पिछले दो–तीन साल में कई राज्यों में एक नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है—
RTI को पैसा वसूलने का ज़रिया बनाने वाले लोग।

गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब—लगभग हर जगह पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे दर्जनों मामले मिल जाते हैं जहाँ कुछ लोग RTI के नाम पर:

  • अफसरों को धमकाते हैं

  • स्कूल/कॉलेज प्रबंधन से “सेटलमेंट” मांगते हैं

  • छोटे व्यवसायियों को डराकर पैसा खींचते हैं

और धीरे-धीरे इसने एक रूप ले लिया है जिसे लोकल स्तर पर लोग “RTI Factory” कहने लगे हैं।


2. असली समस्या कहाँ से शुरू हुई?

RTI को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ी, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है।
लेकिन जब किसी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी पैदा हो जाते हैं जो इसी का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करते हैं।

कई विभागों में:

  • परमिशन में देरी

  • NOC की कमी

  • बिलिंग के छोटे-मोटे अंतर

  • रिकॉर्ड अपडेट न होना

जैसी कमियाँ रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं।
यही कमज़ोर जगहें “RTI ब्लैकमेलरों” का सबसे बड़ा हथियार बन जाती हैं।


3. Fake RTI Factory आखिर होता क्या है?

ये कोई दफ्तर नहीं होता, यह एक नेटवर्क होता है।
छोटे शहरों में यह नेटवर्क कुछ इस तरह काम करता है:

1) सबसे पहले टारगेट चुना जाता है

ऐसी जगहें जहाँ कागज़ी कमियाँ मिलने की संभावना अधिक हो—
जैसे स्कूल, हॉस्पिटल, बिल्डर, दुकानदार, या सरकारी दफ्तर।

2) फिर एक सुनियोजित RTI दाखिल की जाती है

यह RTI हमेशा “कानूनी कमी निकालने” वाली होती है।
जैसे—NOC, निरीक्षण रिपोर्ट, बिल, टेंडर कॉपी, लाइसेंस आदि।

3) इसके बाद असली खेल शुरू होता है

जैसे ही जवाब मिलता है (या जवाब में कोई कमी दिखती है),
टारगेट को इशारों-इशारों में संपर्क किया जाता है:

  • “आपके यहाँ ये कमी मिली है…”

  • “मामला अगर बाहर गया तो परेशानी बढ़ सकती है…”

  • “चाहें तो हम मामला रोक सकते हैं…”

मतलब, बात साफ है—कागज़ात में कहीं भी दरार हो, वहीं से पैसा निकालने की कोशिश होगी।

4) मीडिया और सोशल मीडिया की धमकी

कई लोग यू-ट्यूब/फेसबुक पेज चलाते हैं।
मामला “न्यूज़ स्टाइल” में दिखाने की धमकी दी जाती है।

5) फिर सौदा—सीधा “सेटलमेंट”

रकम छोटी भी हो सकती है, बड़ी भी।
और कई बार एक बार देने के बाद बार-बार पैसे की मांग शुरू हो जाती है।

यही पूरा खेल मिलकर unofficial तरीक़े से एक RTI Factory का रूप ले लेता है।


4. देशभर से मिले कुछ असली उदाहरण

ये मुद्दा सिर्फ थ्योरी नहीं है।
कई राज्यों से ऐसी घटनाएँ रिपोर्ट हो चुकी हैं:

• गुरुग्राम में एक RTI एक्टिविस्ट और एक यूट्यूबर को गिरफ्तार किया गया

आरोप था कि उन्होंने एक निजी स्कूल से “RTI और शिकायत वापस लेने” के नाम पर बड़ी रकम मांगी।

• ठाणे में RTI के नाम पर उगाही करने वाले गिरोह पर केस हुआ

यहाँ शिकायत रोकने और “न्यूज़ कवरेज न करने” के बदले पैसों की मांग की जा रही थी।

• कई राज्यों के सूचना आयुक्तों ने खुद माना कि RTI का दुरुपयोग बढ़ रहा है

कुछ राज्यों में सूचना आयोगों ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि
यदि RTI के नाम पर कोई व्यक्ति धमकी देता है तो सीधी FIR कराएँ।

• व्यापारी, स्कूल, बिल्डर—सब परेशान

सबसे ज़्यादा निशाने पर वो लोग आते हैं जिनका काम:

  • सरकारी लाइसेंसिंग पर निर्भर है

  • जिनके खिलाफ शिकायतें जल्दी वायरल हो सकती हैं

  • जहाँ सार्वजनिक छवि नुकसान का डर ज़्यादा है


5. कौन-कौन सेक्टर सबसे ज़्यादा vulnerable हैं?

  1. स्कूल-कॉलेज – बिल्डिंग सेफ्टी, फीस, मान्यता

  2. बिल्डर/रियल एस्टेट – नक्शा, परमिशन, अतिरिक्त निर्माण

  3. हॉस्पिटल/क्लीनिक – फायर NOC, लाइसेंसिंग

  4. छोटे व्यापारी – दुकान लाइसेंस, GST, म्युनिसिपल परमिशन

  5. सरकारी कर्मचारी – फाइलों में देरी या missing दस्तावेज़

इनके यहाँ अगर कागज़ात थोड़े भी गड़बड़ मिले तो Fake RTI Factory को पूरा खेल खेलने का मौका मिल जाता है।


6. RTI फाइल करना अपराध नहीं—उगाही करना अपराध है

यह बात साफ समझ लेनी चाहिए:

  • RTI फाइल करना कानूनी हक़ है।

  • लेकिन RTI के बहाने “पैसा दो नहीं तो मामला बाहर जाएगा” कहना—
    यह सीधा-सीधा उगाही (Extortion) है।

कानून में इसे लेकर कई धाराएँ लागू होती हैं:

  • धमकी (Criminal Intimidation)

  • उगाही (Extortion)

  • ब्लैकमेल

  • साइबर धमकी (यदि सोशल मीडिया धमकी शामिल हो)


7. अगर आपको इस तरह निशाना बनाया जाए तो क्या करें?

यह हिस्सा आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है:

1) WhatsApp/कॉल/मिलने-जुलने की सभी बातचीत सुरक्षित रखें

धमकी देने का कोई भी सबूत बाद में बेहद काम आता है।

2) किसी भी हालत में ‘सेटलमेंट’ की रकम न दें

एक बार पैसा दिया → फिर दोबारा माँगा जाएगा।

3) RTI का जवाब समय पर दें

जवाब लंबित रहने से आपकी स्थिति कमजोर होती है।

4) ज़रूरत पड़े तो FIR करवाएँ

कई राज्यों में पुलिस ने ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की है।

5) अपना compliance मजबूत रखें

सबसे बड़ा बचाव यही है कि आपके दस्तावेज़ व्यवस्थित हों।


8. असली समाधान क्या है?

RTI को कमजोर करना समाधान नहीं है।
जरूरत है—दुरुपयोग को रोकने की, न कि कानून की ताकत घटाने की।

• सरकारी विभाग ज्यादा जानकारी खुद सार्वजनिक करें

जिससे RTI की जरूरत कम पड़े और ब्लैकमेल की जमीन ही खत्म हो जाए।

• अफसरों को RTI हैंडलिंग की ट्रेनिंग मिले

कई बार डर और भ्रम ही दरवाज़ा खोल देते हैं।

• बार-बार एक जैसी RTI दायर करने वालों पर नियंत्रण

कुछ जगह ये समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।

• Genuine RTI एक्टिविस्ट की सुरक्षा

कई सही लोग खतरे में रहते हैं, उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए।


9. आख़िरी बात: यह सिर्फ RTI का मामला नहीं—यह समाज का सिग्नल है

Fake RTI Factory का फैलना हमें दो बातें बताता है:

  1. सिस्टम में कागज़ात और प्रक्रियाओं की कमियाँ गहरी हैं

  2. लोग RTI को डर पैदा करने का टूल समझने लगे हैं

इन दोनों का इलाज सिर्फ एक है—
पारदर्शिता + समय पर जवाबदेही + सख्त कार्रवाई।

अगर ये तीनों चीजें साथ चलें,
तो RTI अपनी असली भूमिका निभाती रहेगी
और “Factory Model” अपने-आप खत्म हो जाएगा।

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