भारत में EV खरीदने वालों की एक ही शिकायत है—
“कंपनी 170–180 km रेंज बताती है, लेकिन सड़क पर 90–110 km ही मिलता है!”
और सच यह है कि यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि पूरे EV मार्केट में चल रहा एक सुनियोजित ‘Range Scam’ है।
मुद्दा सिर्फ नंबर का नहीं, बल्कि टेस्टिंग मेथड, बैटरी के केमिकल बिहेवियर, BMS ट्यूनिंग और मार्केटिंग गेम का है।
चलिए गहराई से समझते हैं कि कंपनियाँ यह झूठा नंबर कैसे तैयार करती हैं।
1) रेंज ‘लैब कंडीशन्स’ में मापी जाती है, असल सड़क की तरह नहीं
कंपनियाँ जिस टेस्ट से रेंज मापती हैं, उसमे ये शर्तें होती हैं—
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हवा का तापमान 25°C
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कोई पिलियन या भारी वजन नहीं
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लगातार एक समान स्पीड
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कोई ट्रैफिक, ब्रेकिंग या स्टॉप-गो नहीं
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सड़क पूरी तरह फ्लैट
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टायर नया, प्रेशर परफेक्ट
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बैटरी 0 से 100% एकदम नियंत्रित तरीके से डिस्चार्ज
यानी यह टेस्ट असली दुनिया से 100% अलग है।
इसलिए कंपनी की 170 km रेंज की तुलना असल लाइफ 100 km से करना गलत नहीं—क्योंकि कंपनी वास्तव में रियल-लाइफ के लिए रेंज देती ही नहीं।
2) BMS (Battery Management System) की ‘छिपी सेटिंग्स’
यह EV Scam का सबसे तकनीकी हिस्सा है।
कई कंपनियाँ—विशेषकर budget EV brands—जानबूझ कर BMS को इस तरह प्रोग्राम करती हैं कि बैटरी का usable capacity ज्यादा दिखे, जैसे:
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2–4% बैटरी को ‘Reserve’ न दिखाकर usable दिखाना
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Voltage cut-off को थोड़ा high रखना
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Initial phase में बैटरी drain slow दिखाना
इससे शुरू के 50–60 km में रेंज बहुत अच्छी लगती है, पर असली drop बाद में शुरू होता है।
आपने महसूस किया होगा—
0-50 km → बैटरी धीमे घटती
50-100 km → बैटरी अचानक गिरती
100 km के बाद → EV मरने लगता है
यह BMS Manipulation है—जो रेंज को नकली रूप से ज्यादा दिखाती है।
3) “Eco Mode” असल में एक मास्किंग टूल है
कई कंपनियाँ रेंज बढ़ाने के लिए आपको “Eco Mode” देती हैं, पर असल में Eco Mode क्या करता है?
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टॉप स्पीड सीमित
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Torque कम
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Acceleration कम
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Motor current कम
इससे असल में रेंज तो कुछ बढ़ती है, लेकिन यह आपको full performance waveform नहीं देती, जिससे कंपनी रेंज claim को justify कर सके।
कई ब्रांड Eco Mode में range test करते हैं – जो 100% misleading है।
4) बैटरी की असली usable capacity छिपाई जाती है
कंपनी लिखती है—
3 kWh battery pack
लेकिन असल में usable capacity सिर्फ 2.3–2.5 kWh होती है।
बाकी capacity BMS cell balancing के लिए reserve रखता है, जिसे कंपनी रेंज टेस्टिंग में शामिल कर लेती है।
Result?
Customer को 3 kWh का दावा मिलता है…
लेकिन असल में 2.4 kWh की EV मिलता है।
5) भारत की रियल रोड कंडीशंस EV रेंज को 30–40% तक कम कर देती हैं
EV रेंज घटती है कारण:
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ट्रैफिक
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स्टॉप & गो
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ज्यादा ब्रेकिंग
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ओवरलोड
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चढ़ाई
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गर्म तापमान (40–45°C)
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खराब सड़कें
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टायर प्रेशर कम
कंपनियाँ इन फैक्टर्स को ZERO मानकर रेंज दिखाती हैं।
6) ‘IDC Range’ और ‘Certified Range’ का भ्रम – सबसे बड़ा ट्रिक
ज्यादातर EV कंपनियाँ यह दो शब्दों का शिकार बनाती हैं:
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IDC Range (Ideal Driving Conditions)
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ARAI Certified Range
IDC रेंज सिर्फ सैद्धांतिक होती है, यानी प्रैक्टिकली achieve नहीं हो सकती।
ARAI रेंज भी लैब टेस्ट का नंबर है, यह सड़क की रेंज नहीं है।
कंपनियाँ कागज पर IDC लिखती हैं, मार्केटिंग में Certified बताती हैं, और ग्राहक इसे Real Range समझ लेता है।
7) ‘Electric Two-Wheeler Target Schema’ का प्रेशर
सरकार की EV sales बढ़ाने के लक्ष्य के कारण कंपनियाँ
“high range = high sales”
वाले फॉर्मूले पर चलती हैं।
मार्केटिंग टीम कहती है—
“Range बड़ा दिखाओ, लोग खरीदेंगे।”
और यही होता है।
8) छोटे EV ब्रांड चीन से सस्ती सेल खरीदते हैं
कई budget EV brands low-grade चीनी battery cells का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी:
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discharge efficiency कम
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heating ज्यादा
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cycle life कमजोर
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energy density low
इससे रेंज 25–35% तक कम हो जाती है।
तो रियल-लाइफ रेंज आखिर कितनी मिलती है?
नीचे 2024–2025 का verified real-world data:
Company Claim → 160–180 km
Real Range on Indian Roads → 90–110 km
Worst Conditions → 70–85 km
यही असली EV Range Scam है।
कंपनी दोगुनी रेंज का सपना दिखा देती है।
9) ग्राहक रेंज कैसे चेक करें? (Pro Tips)
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Certified range से 40% कम मानकर चलें
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Eco mode में रेंज नहीं—Normal mode में टेस्ट करें
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Battery capacity × 0.75 = अनुमानित usable capacity
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Summer में 15–20% और रेंज कम होगी
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Dual battery EV में रेंज ज्यादा accurate मिलती है
10) क्या सरकार इस पर कुछ कर रही है? (2025 Update)
Transport Ministry ने 2025 में नई गाइडलाइंस पर काम शुरू किया है—
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Real-world range testing
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शहर/ट्रैफिक आधारित रेंज
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बैटरी usable capacity disclosure
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चार्जिंग cycle degradation report
लेकिन अभी जमीन पर कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
Final Verdict: EV Range Scam एक मार्केटिंग ट्रिक है… और इसका शिकार हर ग्राहक होता है
कंपनियाँ जानती हैं कि—
“Range बिकता है…
और नंबर की हेराफेरी से हर EV सुपरहिट बनाई जा सकती है।”
इसीलिए 180 km का सपना दिखाकर 100 km का EV दिया जाता है।
यह सिर्फ गलती नहीं, एक पूरा ऑपरेटेड EV Range Scam है – जिसमें
lab testing, BMS tuning, marketing और misleading certification शामिल है।
